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हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस लीला सेठ का निधन

Written By Smart Edu Services on सोमवार, 8 मई 2017 | 6:26 am

देश में किसी हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस लीला सेठ नहीं रहीं। शुक्रवार देर रात उनका हार्टअटैक से नोएडा में निधन हो गया। वह 86 वर्ष की थीं। 3 हफ्ते पहले वह गिर कर घायल हो गई थीं। उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक पार्थिव शरीर को रिसर्च के लिए दान दे दिया जाएगा। लीला का जन्म 20 अक्टूबर 1930 में लखनऊ में हुआ था। उन्होंने 1958 में लॉ की पढ़ाई मां बनने के बाद लंदन में की थी और टॉप किया था। वह 1978 में दिल्ली हाईकोर्ट की जज बनीं। 1991 में हिमाचल प्रदेश की पहली महिला चीफ जस्टिस नियुक्त की गईं। लीला सेठ लेखक विक्रम सेठ की मां थीं। एक साक्षात्कारमें लीला सेठ ने कहा था कि 'मैं बचपन में नन बनना चाहती थी, पर पिता राज बिहारी सेठ की मौत के बाद मेरा जीवन बदल गया। वह मुझे आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। कहते थे कि मैं तुम्हारी शादी में दहेज बिल्कुल नहीं दूंगा। कानून की पढ़ाई करना मेरी किस्मत में लिखा था। मैंने मां बनने के बाद पति के साथ लंदन में रहते हुए लॉ की पढ़ाई पूरी की थी। कई बार मुझे क्लास में जाने के लिए भी समय नहीं मिल पाता था।
इसके बाद भी मैंने लंदन बार की परीक्षा में टॉप किया।' लीला कहती थीं कि अपने बेटों को उसी तरह की परवरिश दो जैसे अपने बेटी को देते हो, ताकि वे भी दयालु बने सकें। एक बार उन्होंने बच्चों के लिए एक किताब को लिखते वक्त की घटना का जिक्र किया था। इसमें बताया कि इंडियन, अमेरिकन और यूरोपियन बच्चों के लिए किस तरह मूल्यों का महत्व अलग-अलग है। इन तीनों जगहों के बच्चों से मैंने पूछा कि ये एक बांसुरी है। इसे एक बच्चे ने बनाया है, दूसरा बच्चा इसे बहुत सुंदर बजाता है, जबकि तीसरे बच्चे के पास एक भी खिलौना नहीं है। इसे किसे देना चाहिए? अमेरिकन बच्चे ने कहा कि जिसने इसे बनाया है। इसका आशय था कि अमेरिकन अपने मूल अधिकारों को लेकर बहुत ही सख्त होते हैं। यूरोपियन बच्चे ने कहा, जिसने खूबसूरत तरीके से बजाया। वह स्किल के पक्ष में था। जबकि भारतीय बच्चा बोला, जिसके पास खिलौना नहीं है। क्योंकि भारतीय बच्चा दयालु हृदय का था। लीला ने अपनी ऑटोबायोग्रफी 'ऑन बैलेंस' में अपने बेघर होने, लंदन में लॉ की पढ़ाई, पटना, कोलकाता और दिल्ली में प्रैक्टिस का अनुभव साझा किया है। उन्होंने 2014 में 'टॉकिंग ऑफ जस्टिस: पीपुल्स राइट्स इन मॉडर्न इंडिया' भी लिखी है। जिसमें अपने कानूनी कैरियर का जिक्र किया है। 
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