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निजी बस ऑपरेटर्स से परमिट वापस लेने पर सरकार और रोडवेज कर्मी अड़े, आज भी नहीं चली सरकारी बसें

Written By Smart Edu Services on बुधवार, 12 अप्रैल 2017 | 9:10 pm

प्राइवेट बस ऑपरेटर्स को परमिट जारी करने के विरोध में रोडवेज के सभी 19,500 कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। इससे प्रदेश की सभी 4200 रोडवेज बसों का चक्का जाम हो गया। यात्रियों की असुविधा के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे तो सरकार भी नहीं झुकी। परिवहन मंत्री के साथ रोडवेज की 8 यूनियनों की दो पार्ट में हुई तीन दौर की वार्ता में भी कोई सहमति नहीं बनी। कर्मचारियों ने सभी 273 रूटों पर परमिट रद्द करने की मांग की। जबकि सरकार का कहना है कि ये परमिट रद्द नहीं किए जा सकते। इस पर कर्मचारियों ने वोल्वो और एक्सप्रेस समेत सभी बसों को नहीं चलने देने का ऐलान किया है। एक दिन की हड़ताल से रोडवेज को 4 से 5 करोड़ तक के नुकसान का अनुमान है। 
चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच दोपहर करीब 12.30 बजे बातचीत शुरू हुई। इसमें जॉइंट एक्शन कमेटी के तहत 8 विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार की ओर से परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार, विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएस ढिल्लों, आयुक्त सुप्रभा दहिया, डायरेक्टर जनरल अनीता यादव के अलावा सीएम के प्रधान सचिव आरके खुल्लर भी मौजूद रहे। मंत्री ने कहा कि ट्रांसपोर्ट पॉलिसी को लेकर हाईकोर्ट में 20 अप्रैल को सुनवाई है। तब तक कर्मचारियों को धीरज रखना चाहिए। कोर्ट के जैसे भी डायरेक्शन होंगे, सरकार उसके मुताबिक काम करने को तैयार है।
कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। 
  • नई पॉलिसी से जनता काे फायदा होगा। कर्मचारियों को भी दिक्कत नहीं होगी। 
  • इसे लागू किया जाएगा। सरकार इसे रद्द करने में असमर्थ है। 
  • 273 रूटों पर 853 निजी बसों को रूट परमिट जारी किए हैं। 
  • 80% वही लोग हैं जो पुराने परमिटों पर बसें चला रहे थे। इनमें कुछ ने रूट बदले हैं। 
  • 20% ऐसे हैं, जिन्होंने केवल जिले बदले हैं। 
  • नई पॉलिसी में 1669 एप्लीकेशन और आई हैं। 
  • कर्मचारी चाहते हैं तो उन्हें परमिट जारी नहीं करेंगे। 
  • 1993 से 2003 के बीच दिए करीब 859 परमिटों को रद्द करने को तैयार हैं। 
  • नई परिवहन पॉलिसी से कर्मचारियों का ही नुकसान होगा। 
  • नए परमिट से निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे रद्द किया जाना चाहिए। 
  • पुरानी परिवहन पॉलिसी के तहत जो बसें चल रही है। उनसे कोई एतराज नहीं है। 
  • अगर पुराने परमिट चलते हैं तो उनके लिए इंतजार किया जा सकता है। 
  • हालांकि, उन परमिटों को हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। 
  • लेकिन फरवरी 2017 में जारी परिवहन पॉलिसी के तहत दिए गए सभी 273 रूट पर परमिटों को रद्द किया जाए।
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